मिडिल ईस्ट तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल सस्ते, PM मोदी की अहम बैठक आज
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सरकार ने 60 दिनों के ईंधन भंडार का दावा किया, LPG-PNG नियम सख्त किए और अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी घटाकर पेट्रोल ₹3 और डीज़ल ₹10 सस्ता किया, महंगाई कम करने की कोशिश।
Delhi/ पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कटौती का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी कम करते हुए पेट्रोल को ₹3 और डीज़ल को ₹10 तक सस्ता कर दिया है। यह कदम वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और सप्लाई चेन पर संभावित असर को देखते हुए उठाया गया है। इस फैसले से महंगाई के दबाव को कम करने की कोशिश भी साफ नजर आ रही है।
इसी बीच, प्रधानमंत्री Narendra Modi आज शाम देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, ऊर्जा सुरक्षा, ईंधन आपूर्ति और संभावित संकट से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। केंद्र सरकार ‘टीम इंडिया’ के तहत राज्यों के साथ समन्वय को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
हाल ही में संसद में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने संकेत दिया था कि यदि ईरान से जुड़ा संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत पर भी पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को पहले से तैयार रहना होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति का प्रभाव कम किया जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल और डीज़ल की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत के पास लगभग 60 दिनों का पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है। सोशल मीडिया पर फैल रही ईंधन किल्लत की खबरों को पूरी तरह अफवाह बताया गया है। साथ ही, भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
घरेलू गैस की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने LPG और PNG को लेकर भी नए नियम लागू किए हैं। शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन का गैप सिलेंडर बुकिंग के बीच अनिवार्य किया गया है। वहीं PNG कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को LPG सिलेंडर रखने की अनुमति नहीं होगी और उन्हें इसे सरेंडर करना होगा।
केंद्र सरकार का मानना है कि वैश्विक संकट के समय राज्यों की भूमिका बेहद अहम होती है। यही वजह है कि इस उच्चस्तरीय बैठक के जरिए संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति तैयार की जा रही है। मौजूदा हालात में सरकार एक ओर जहां आम जनता को राहत देने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर भी फोकस बनाए हुए है।